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शुक्रवार, 25 मई 2018

गुर्जर नेता नेपाल सिंह कसाना ने किया इलाहाबाद के गुर्जर बाहुल्य गांवों का दौरा

इलाहाबाद में गुर्जर भूर्तियाओ के गांवो का दौरा

मेरे इलाहाबाद प्रवास के दौरान श्री कोमल सिंह गुर्जर ( स्टेशन अधीक्षक भदोही ,उत्तर प्रदेश) ने बताया कि इलाहाबाद में भी 15-16 गांव में गुर्जर रहते हैं। जो खुद को भूरतिया कहते हैं। मैं और मेरे साथी 19 मई 2018 को इलाहाबाद से  लगभग 60 किलोमीटर दूर इलाहाबाद-रीवा-मुंबई हाईवे पर नारीबारी कस्बे के समीप स्थित लेडियारी ग्राम में पहुंचे। वहां पर हम लोग एक विशाल भवन वाले इंटर कॉलेज में पहुंचे। वहां पहुंचने पर पता चला कि इस गांव में लड़कों के लिए अलग इंटर कॉलेज और लड़कियों के लिए अलग इंटर कॉलेज समाज के द्वारा बनाए गए हैं। जब हम वहां पहुंचे तो लगभग डेढ़ सौ से 200 लोग हमारे स्वागत में एकत्रित हुए थे। इन लोगों में कई गांवों के ग्राम प्रधान ब्लाक प्रमुख और अनेकों अन्य गणमान्य लोग शामिल थे।साथ ही साथ इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रबंधक और समस्त स्टाफ भी वहां पर मौजूद था। इन सभी लोगों ने फूल मालाओं से हमारा गर्मजोशी से हार्दिक स्वागत किया। सभी लोगों के साथ विस्तृत चर्चा में भुरतिया गुर्जर कैसे बने इस विषय पर गहन चर्चा हुई। मैंने उन लोगों को उन का 400 साल पुराना क्रांतिकारी इतिहास बताया तथा उनके गुर्जर होने के प्रमाण उनके सम्मुख प्रस्तुत किए।उन्होंने बताया कि आसपास के क्षेत्र में गुर्जर संख्या में तो कम है लेकिन काफी प्रभावशाली है।और यहां पर गुर्जर भूर्तिया लोग 100 से 1500 बीघा तक के बड़े किसान और जमीदार हैं। इन लोगों ने बताया कि इन दोनों कॉलेजों की स्थापना स्वतंत्रता सेनानी श्री शिव जियावन जी ने 1970 में ही कर दी थी। और इस इंटर कॉलेज में समाज के सभी लड़के लड़कियां अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। और सरकारी नौकरियों तक पहुंच रहे हैं। अगले साल 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर कॉलेज में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल होने का निमंत्रण इन लोगों ने मुझे दिया। स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री शिव जियावन जी कितने प्रभावशाली थे इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री, श्री जवाहरलाल नेहरू, श्री अटल बिहारी वाजपेई और रीता बहुगुणा जोशी जैसे बड़े-बड़े नेता उनके संपर्क में थे। और इनके गांव में आ चुके हैं। विस्तृत चर्चा के बाद इन लोगों ने कहा कि कसाना जी जैसा कि आपने हमें हमारे इतिहास के बारे में बताया आगे से हम लोग खुद को भूर्तिया न कहकर गुर्जर भूर्तियां कहना शुरू करेंगे। और अपने आप को गुर्जर समाज का ही हिस्सा मांनेगे।चर्चा के दौरान मैंने अपना दल(एस) को नीतियों के बारे में विस्तार से बताया और अपना दल से जुड़ने के लिए सभी लोगो को प्रेरित किया।

चौधरी नेपाल सिंह कसाना
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष-अखिल भारतीय गुर्जर महासभा
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष-अपना दल (एस)
प्रभारी-पश्चिमी यूपी/ राजस्थान

गुरुवार, 24 मई 2018

बेवजह फतवे जारी करने वालों का गुर्जर समाज करेगा विरोध

बेवजह फतवे जारी करने वालों का गुर्जर समाज करेगा विरोध

गुर्जर समाज ने किया गुर्जर नेता हीरालाल गुर्जर का अभिनंदन

मांडलगढ़(24मई2018)

मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सिंहजीकाखेड़ा गांव में आम चौखला गुर्जर समाज की महापंचायत का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री कोटडी चारभुजा गुर्जर समाज मन्दिर निर्माण कमेटी के अध्यक्ष हीरालाल गुर्जर के बिजोलिया ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक अध्यक्ष बनाने पर समस्त आम चौखला गुर्जर समाज द्वारा श्री हीरालाल गुर्जर का स्वागत समारोह आयोजित किया गया। महापंचायत को हीरालाल गुर्जर अध्यक्ष- आम चौखला गुर्जर समाज, किशोर गुर्जर सिंहजीकाखेड़ा, रामा गुर्जर गुलाखेड़ा, भेरूलाल गुर्जर बीगोद, बद्रीलाल गुर्जर गेंदलिया, घीसालाल गुर्जर रडा, कन्हैयालाल गुर्जर अध्यक्ष गुर्जर समाज त्रिवेणी चौखला, एडवोकेट शंकरलाल गुर्जर दांतडा, शंकरलाल गुर्जर सरपंच भोजपुर, कालूलाल गुर्जर जिलाध्यक्ष युवा गुर्जर महासभा, भंवरलाल गुर्जर सांखडा, देवकरण गुर्जर खटवाडा, कालू गुर्जर गेंदलिया, बद्री गुर्जर गेंदलिया, मगनलाल गुर्जर मुख्य यजमान कोटडी श्याम महोत्सव, राधेश्याम गुर्जर मोही ब्लॉक अध्यक्ष- युवा गुर्जर महासभा मांडलगढ़, चतरा गुर्जर गुलाखेड़ा, बद्री गुर्जर धुमडास, भोजा गुर्जर कांगसोकाखेड़ा, सोजीराम गुर्जर बागुदार, भवाना गुर्जर सोलाखेड़ा, भेरूलाल गुर्जर केसरपुरा, लादूलाल गुर्जर भड़किया, जयलाल गुर्जर देवखेड़ा, चंदा गुर्जर बारेठजीकाखेड़ा, किसन गुर्जर गुदलिया, खेमा गुर्जर मोही, सवाईराम गुर्जर, खाना गुर्जर कटारियाखेड़ा, भेरू मोटर, हरि गुंजल, रामलाल गुर्जर बागाकाखेड़ा, बालू गुर्जर बागाखेड़ा, रामा गुर्जर जगपुरा, कन्हैयालाल गुर्जर ब्लॉक अध्यक्ष- युवा गुर्जर महासभा कोटड़ी, बालू कटारिया, हीरा गुर्जर घेवरिया, सूरजमल गुर्जर देवखेड़ा, जीवन गुर्जर सालरिया, गोपाल मोटर, कालू गुर्जर खटवाडा, काशीराम गुर्जर, माधु गुर्जर सोलाखेड़ा, देवकरण गुर्जर मंशा, प्रभु गुर्जर मन्शा, भेरू गुर्जर कल्याणपूरा, बरदा गुर्जर खारीखेड़ा, भेरूलाल गुर्जर जस्साजीकाखेड़ा, रतिराम गुर्जर गाड़िया, मांगीलाल गुर्जर मन्शा, भेरू गुर्जर मंशा, राजू गुर्जर सिंहाना, माधु गुर्जर सोलाखेड़ा, देबी गुर्जर मोही, कालू गुर्जर बीगोद, भेरूलाल गुर्जर गहूंली, एडवोकेट रामस्वरूप गुर्जर, नन्दलाल गुर्जर आदि ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर समस्त गुर्जर समाज आम चौखला ने निर्णय लिया कि समाज मे बेवजह फतवे जारी करने वालों का गुर्जर समाज विरोध करेगा। सभी ने सामाजिक एकता पर जोर दिया।

सोमवार, 21 मई 2018

बार बार समझौतों ने समाप्त कर दिया गुर्जर आरक्षण के मामले को

समझौते ने समाप्त कर दिया गुर्जर आरक्षण के मामले को

समाज को कुछ भी नहीं हुआ हासिल

अखिल भारतीय गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामवीर सिंह विधूड़ी ने कहा कि राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति और राजस्थान सरकार के बीच 19 मई को जो समझौता हुआ है उसके  माध्यम से एक प्रकार से आरक्षण के मुद्दे को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
इस मामले में यह जानना बहुत  जरूरी है कि वर्ष 2013 में भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में और फिर वर्ष 2015 में जब राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति और राजस्थान सरकार के बीच में जो समझौता हुआ उसमे यह बात स्पष्ट रूप से कही गई कि गुर्जर तथा चार अन्य जातियों को सरकारी नौकरियों में पाँच प्रतिशत आरक्षण दिया जायेगा तथा इस मामले को संविधान की नौवीं अनुसूची में    शामिल किया जायेगा ताकि आरक्षण का यह मामला सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट अथवा किसी भी अदालत के दायरे से बाहर हो जाए। किसी अदालत   में उसको चुनौती नहीं दी जा सके।
राजस्थान सरकार और राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के बीच समझौते में यह भी तय किया गया था कि राज्य सरकार गुर्जर बहुल गांवों में डिस्पेंसरी, हॉस्पिटल, स्कूल, कॉलेज, सड़क, पीने के पानी की व्यवस्था आदि काम पर प्रतिवर्ष 500 करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह राशि अब 5000 करोड़ रुपये हो चुकी है। सरकार बताये कि उसने किन किन गांवों पर कितनी कितनी राशि खर्च की है।
अब राजस्थान सरकार ने राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के साथ जो समझौता किया है उससे समाज का कोई भला नहीं होने वाला। सही बात तो यह है कि इस समझौते द्वारा आरक्षण के मामले को हमेशा हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

बुधवार, 2 मई 2018

गुर्जर समाज भारत की रक्षा में सदैव आगे रहा - नरेन्द्र सिंह गुर्जर

गुर्जरों का इतिहास गौरवशाली है। गुर्जर सम्पूर्ण भारतवर्ष एवं पश्चिमी भाग में सिंध के पार एवं अफगानिस्तान तक निवास करते है। देश पर ईसा पूर्व से ही उत्तर-पश्चिम  से विदेशी आक्रंताओं ने आक्रमण प्रारम्भ कर भारतवर्ष पर कब्जा करने की कोशिश की तो विदेशी आक्रंताओ का सबसे पहले गुर्जरों से ही  मुकाबला हुआ। इसा पूर्व सिकन्दर महान ने भारत पर आक्रमण किया तो गुर्जर राजा पोरूष ने सिकन्दर को मजबूती से टक्कर दी, परिणाम स्वरूप सिकन्दर को सिन्ध नदी से ही वापिस युनान लौटना पड़ा। कालान्तर में गुर्जर कृषि के धन्धे में रहे तथा इतिहास के मध्यकाल में विदेशी आक्रंताओं ने पुन: भारत पर आक्रमण  प्रारम्भ किये तो उतरी पश्चिमी भारत के गुर्जर वीरो ने विदेशी आक्रंताओ से लोहा लिया तथा उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया। देश की आजादी एवं सुरक्षा के मामले में देश के हितों के लिए गुर्जरों ने सदैव ही अपना खून पसीना बहाया और कुर्बानिया दी है। गुर्जर एक दृढ इच्छा शक्ति वाली कौम है जो र्शोर्य और साहस से भरपूर है।
  गुर्जर न्याय, कर्मशीलता एवं सत्य का प्रतीक है तथा आत्मविश्वास से भरपूर है। पुराने समय में गुर्जर जब गांव बसाते थे तो सभी जातियों को न्योता देकर उन्हें अपने गांव में बसाते थे। गुर्जरों के साथ रहकर अन्य सभी जातियां सामन्तों एवं लुटेरों से अपने आप को सुरक्षित महसूस करती| इशा से पूर्व गुर्जर शासन व्यवस्था गणराज्य के रूप में थी। शासन तंत्र में गणराज्य की अवधारणा सर्वप्रथम गुर्जर जाति ने ही प्रारम्भ एवं स्थापित की थी। ईसा पूर्व से लेकर तेरहवी सताब्दी तक विश्व में गुर्जर सम्राज्य था, लेकिन तेरहवी सदी के बाद गुर्जर राज शक्ति के छिन्न भिन्न होने पर सामन्तों ने शासन की कल्याणकारी अवधारणा को छोड़कर पोषण, लूट-पाट, कुरता आपसी लडाईयो एवं जनता के साथ छल कपट के धन्धें में आ गये तो गुर्जर जाति ने अपने आप को शासन व्यवस्था से अलग करके कृषि एवं पशु पालन का धन्धा अपना लिया।
  देश की सुरक्षा के लिये गुर्जर हमेशा तत्पर रहते है। जब-जब देश  को पडोसी देशो ने युद्ध में उलझाया तब गुर्जरों ने देश की सेना का भरपूर साथ दिया। देश  की सीमाओं पर हुये शहीदो में गुर्जर जाति की संख्या सबसे अधिक है। गुर्जर जाति का ध्येय है सामाजिक समरस्ता, बन्धूत्व, कत्वर्यनिष्ठा, कर्मशीलता, सत्यता, सुसंभ्य नागरिक, सबका साथ, सबका विकास, एवं देश की सुरक्षा।
नरेन्द्र सिंह गुर्जर
पूर्व प्रदेश संयोजक
अखिल भारतीय युवा गुर्जर महासभा राजस्थान

भारतराष्ट्र रक्षक गुर्जर कौम : नरेन्द्र सिंह गुर्जर

गुर्जरों का इतिहास गौरवशाली है। गुर्जर सम्पूर्ण भारतवर्ष एवं पश्चिमी भाग में सिंध के पार एवं अफगानिस्तान तक निवास करते है। देश पर ईसा पूर्व से ही उत्तर-पश्चिम  से विदेशी आक्रंताओं ने आक्रमण प्रारम्भ कर भारतवर्ष पर कब्जा करने की कोशिश की तो विदेशी आक्रंताओ का सबसे पहले गुर्जरों से ही  मुकाबला हुआ। इसा पूर्व सिकन्दर महान ने भारत पर आक्रमण किया तो गुर्जर राजा पोरूष ने सिकन्दर को मजबूती से टक्कर दी, परिणाम स्वरूप सिकन्दर को सिन्ध नदी से ही वापिस युनान लौटना पड़ा। कालान्तर में गुर्जर कृषि के धन्धे में रहे तथा इतिहास के मध्यकाल में विदेशी आक्रंताओं ने पुन: भारत पर आक्रमण  प्रारम्भ किये तो उतरी पश्चिमी भारत के गुर्जर वीरो ने विदेशी आक्रंताओ से लोहा लिया तथा उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया। देश की आजादी एवं सुरक्षा के मामले में देश के हितों के लिए गुर्जरों ने सदैव ही अपना खून पसीना बहाया और कुर्बानिया दी है। गुर्जर एक दृढ इच्छा शक्ति वाली कौम है जो र्शोर्य और साहस से भरपूर है।
  गुर्जर न्याय, कर्मशीलता एवं सत्य का प्रतीक है तथा आत्मविश्वास से भरपूर है। पुराने समय में गुर्जर जब गांव बसाते थे तो सभी जातियों को न्योता देकर उन्हें अपने गांव में बसाते थे। गुर्जरों के साथ रहकर अन्य सभी जातियां सामन्तों एवं लुटेरों से अपने आप को सुरक्षित महसूस करती| इशा से पूर्व गुर्जर शासन व्यवस्था गणराज्य के रूप में थी। शासन तंत्र में गणराज्य की अवधारणा सर्वप्रथम गुर्जर जाति ने ही प्रारम्भ एवं स्थापित की थी। ईसा पूर्व से लेकर तेरहवी सताब्दी तक विश्व में गुर्जर सम्राज्य था, लेकिन तेरहवी सदी के बाद गुर्जर राज शक्ति के छिन्न भिन्न होने पर सामन्तों ने शासन की कल्याणकारी अवधारणा को छोड़कर पोषण, लूट-पाट, कुरता आपसी लडाईयो एवं जनता के साथ छल कपट के धन्धें में आ गये तो गुर्जर जाति ने अपने आप को शासन व्यवस्था से अलग करके कृषि एवं पशु पालन का धन्धा अपना लिया।
  देश की सुरक्षा के लिये गुर्जर हमेशा तत्पर रहते है। जब-जब देश  को पडोसी देशो ने युद्ध में उलझाया तब गुर्जरों ने देश की सेना का भरपूर साथ दिया। देश  की सीमाओं पर हुये शहीदो में गुर्जर जाति की संख्या सबसे अधिक है। गुर्जर जाति का ध्येय है सामाजिक समरस्ता, बन्धूत्व, कत्वर्यनिष्ठा, कर्मशीलता, सत्यता, सुसंभ्य नागरिक, सबका साथ, सबका विकास, एवं देश की सुरक्षा।
    
नरेन्द्र सिंह गुर्जर सीआर
पूर्व प्रदेश संयोजक
अखिल भारतीय युवा गुर्जर महासभा राजस्थान

गोपेन्द्र सिंह पावटा ने की मन की बात बयां

गुर्जर आरक्षण :मेरे मन की बात
दोस्तों ये हमारे हक की लड़ाई नूतन नही वरन् ये हमारा इतिहास पुराना है पता नही इतने आयोग बने इतनी सिफारिशे हुई इतना अध्ययन हुआ पर उनका लेख रह गया कुछ परिणाम नही आया ,,जब आरक्षण की बात राजस्थान में होती है तो लोग जान जाते है यह मुद्दा गुर्जरो का है पर मेरे दोस्त जब हमसे यह पूछते है की यह मुद्दा कब तक रहेगा तो जवाब सिफर हो जाता है,समाज का जीवन संगर्ष है यह निश्चित नही होना चाहिए है पर संघर्ष बना रहे यह उचित नही।क्योकि समाज को उन्नति की राह भी देखनी है पता नही जैसे जैसे गर्मियों आ जाती है आरक्षण जिन उभर के आ जाता है युवा रैली युवा आक्रोश ,आर पार, अंतिम बार ,एक बार,अब आखिरी बार, पर पता नही हम कैसे विद्वान बन बैठे है जो हक तक पहुंच ही नही पा रहे,क्योकि कहि न कहि यह मुद्दे को जाट आरक्षण के साथ जोड़ा जाए तो जब सम्मानीय विश्वेंद्र सिंह जी भरतपुर जाट आरक्षण की बात कर रहे थे और उस संदर्भ में धरने पर बैठे थे तब उनका जन्मदिवस उन दिनों में आया था जब SP और कलेक्टर उनके पास केक लेकर गए तो उन्होंने साफ मना कर दिया और कहा कि मेरे समाज का हक मिलने के बाद आपके साथ केक आपके दफ्तर में काटूँगा, वरना मेरा जन्मदिन हक मिलने तक नहीं मनाऊंगा न यहाँ से हटूंगा वहीं दूसरी तरफ हम लोग होटल तीज सरकारी होटलों के बार-बार दर्शन लाभ कर आते हैं मुझे लगता है  और मेरा मानना भी है कि जब तक हम हमारा हक नहीं पा लेते तब तक हमें सरकार का एक अन्न का दाना भी नहीं खाना चाहिए पर यह नेताओ को कौन समझाये,
हमें हमारा हक तरीके से लड़ना है और गैर समाजों के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आगे बढ़ना है दोस्तों हम हर समाज के साथ लग जाते हैं पर हमारे साथ अन्य समाज खड़े इसलिए नहीं होते कि हर 6 महीने में हम लोग आरक्षण का जिन और जिंद वापस लेकर आ जाते हैं मिलना है या नहीं मिलना है बात यहां होनी चाहिए वैधानिक संविधान इन सब को ले तो यह सोचना चाहिए कि हमने आज तक लड़ाई कैसे लड़ी ।
मेरे जहन के कुछ सवालात :
1. हमने आरक्षण की लड़ाई  छात्रावास,छात्रवृत्ति  के लिए नहीं की थी !
2.हमारी मांग ST या ST के समकक्ष आरक्षण की थी!
3.क्या हमारी मांग MBC, OBC, SBC, थी!
4.हमारी मांग समाज के हक के लिए विकास की थी द्वीत्तीय व्यवस्था देवनारायण बोर्ड या कोई और मांग थी।समाज के लिए  प्रथम व्यवस्था आरक्षण थी
लेकिन ना हम अपनी बात पर टिके ना अपने ख्यालात पर रोज नयी मांग रोज नये सूत्र
5. क्या हमने हमारी लड़ाई इसलिए लड़ी थी की कि हमारे नौनिहालों का भविष्य हम कानून की बेड़ियों में जकड़ कर उनका भविष्य बर्बाद कर दें समाज को नई राह और नए रास्ता दिखाना है तो आरक्षण की लड़ाई एक बार लड़ कर अपने को साबित करना है अगर हम यही रोज हर बार कहते रहे तो लोगों की हंसी का पात्र बन जाते हैं कि मेरे भाई अबकी बार आखरी है ना ।अब कौन पूछे इन नेताओ से की आखरी बार है या मैच के बीच में बरसात आनी है।
6.मुझे डर है की अब गर आरक्षण की लड़ाई में वो लोग शिकार हो गए जिनके लिए आरक्षण माँगा जा रहा है तो फिर आरक्षण दोगे किसको।
7.बार बार प्रश्न यह भी आता है की इस लड़ाई को आप पकड़ो, या झोला आप पकड़ो पर प्रश्न यह नही होना चाहिए,,क्योकि कुर्बानी समाज ने आपके एक आदेश पर दे दी आगे भी देगा और देता रहेगा मगर आपको यह अंतर्मन से महसूस होना चाहिए कि क्या मैंने आज तक समाज के आरक्षण की लड़ाई उचित और अनुचित देखकर लड़ी है या फिर रोज नई-नई मांगो को लेकर।
8.हर बार घोषणा होती है की आरक्षण संघर्ष समिति भंग पर हर बार मीटिंग में वो ही क्यों।
9.अब हमारे समाज के प्रथम स्तर के नेताओ को सोचना चाहिए की कहि आपको आपकी गरिमा और सम्मान रखना है तो समाज को हासिये पर रखना छोड़ दो वरना हश्र आपका पडोसी नेता जैसा हो सकता है।
10 आप हर बार सामाजिक नेता और राजनेता की लड़ाई लड़ाने में मसगुल मत हो दोनों साथ बैठ कर लड़ाई लडो दोनों की मुछो की लड़ाई में समाज पिस रहा है
11.हर बार आरक्षण में हमे लोग हींन भावना से देखते है क्योकि रोज आंदोलनों से उपद्रवों से जनता ऊब चुकी है अब आपको इसका स्थाई समाधान ढूंढना चाहिये,मेरा मानना है की हमारा आरक्षण का मुद्दा राम मंदिर मुद्दा न बन जाये क्योकि ना राम मंदिर बन पा रहा है ना गुर्जर आरक्षण मिल पा रहा है।
12.आज इस बात को नही कहना चाहिए पर मन है कहूँगा की कर्नल साब अच्छे है समाज के सिरोधार्य है पर जब तक आप यु निर्णय करते रहोगे की
कर्नल साब बहुत अच्छे ,मजा बांध दिए आज तो भाषण में,आप के फैसले जो सोचते हो वो तो कोई सोच ही नही सकता,आप ने ये बात तो गजब कह दी तो गर ये चटुकार,फालतू के पुल बंधने वाले वाले पोल और पुल को हमेशा तहस नहस कर दते है
  सभी बुरे नही पर सच कहने वालो की विसेस कमी है गर युही चलता रहा तो हम गहरे बर्बादी के आलम में जाकर अन्य समाजो बहुत पीछे होंगे।।
( सभी का विशेष दिल से सम्मान करता हूं सभी मेरे अग्रज हैं पर कहीं इन बातों से किसी को ठेस या पीड़ा हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं मगर जो लगा वह कहा फिर लिखा और किसी व्यक्तिगत आदमी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि मैंने किसी एक के लिए व्यक्तिगत लिखी है)कर्नल साब के प्रति मेरे दिल में विसेस सम्मान है पर सच तो सच ही है
"""'समाज की पीड़ा को समझता हूं इसलिए सच  लिखता हूं!"""'
आपके सुझाव के इन्तजार में
गोपेन्द्र सिंह पावटा
प्रदेशाध्यक्ष
अखिल भारतीय अखिल युवा गुर्जर महासभा
पार्षद
नगर परिषद हिण्डौन सिटी

काले झंडे दिखाने वालों के नाम गुर्जर नेता दिनेश गुर्जर का पैगाम

सभी राजनैतिक दलों के आदरणीय साथियों से मेरी विनम्र अपील:----

        साथियों में पिछले 20-21 वर्षों से में समाजवादी पार्टी से जुड़ा हूँ।  समाजवादी पार्टी के संगठनों में विभिन्न -2 पदों पर काम किया और वर्तमान में भी सगठन में काम कर रहा हूँ। इसके साथ साथ  में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के  पिछले 3 वर्षों से प्रदेश अध्यक्ष भी हूँ। इस कारण पार्टी के सगठन ओर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते अक्सर दूसरे प्रान्तों में आना जाना लगा रहा है। *पिछले 10 दिनों से मेरे दिन में एक सवाल आ रहा है जिसे में आप सब साथियों के बीच बाटना चाहता हूँ। कि हमारे पूरे देश के कुछ बड़े नेताओं तथा प्रधानमंत्री / केंद्रीय मंत्री/प्रदेश के मुख्यमंत्री/ प्रदेश के मंत्री तथा सभी राजनैतिक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा उन्ही दलों के कुछ बड़े नेताओं को बहुत जगह काला झंडा दिखाकर विरोध दर्ज करने की परम्परा चली आ रही है। ऐसा क्यों। क्या इस परम्परा को हम कुछ भी करके खत्म नही कर सकते है। पहले तो हमारी चुनी हुई सरकारें राजनैतिक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष बड़े नेताओं को जनता के लिए अच्छा कार्य करे। ताकि उनको किसी भी जिले या राज्य में जाने पर विरोध झेलना न पड़े।
    कुछ समय पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय योगी जी जनपद बुलंदशहर में आये थे। इस दौरान समाजवादी पार्टी के कुछ साथियों ने उनको काले झंडे दिखाये। यह एक परम्परा सी पड गई है। *जब प्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय अखिलेश यादव जी थे तब सर्वाधिक काले झंडे BJP के कार्यकर्ताओं ने दिखाये थे* जबकि प्रदेश में आदरणीय अखिलेश यादव जी ने आज तक के इतिहास में सबसे अच्छा कार्य और अत्यधिक विकास किया।
    आदरणीय साथियों में सभी जनपद बुलंदशहर ओर आसपास के सभी राजनैतिक दलों के नेताओं और साथियों से विनम्र निवेदन करना है चाहता हूँ कि हम सबको मिलकर सकारात्मक सोच के साथ राजनीति में कटुता को छोड़कर आपसी तालमेल से हम इस बहुत खराब परम्परा( काले झंडे दिखाने की ) को खत्म करना चाहिए।
   आदरणीय साथियों अगर आपको किसी भी राजनैतिक पार्टी के नेता/ मुख्यमंत्री/ प्रदेश के मंत्री से कोई शिकायत है तो उस शिकायत को हम समय लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री/ मंत्री तथा जनपद के प्रभारी मंत्री / प्रदेश अध्यक्ष से मिलकर अपनी बात संयम से कह सकते है। में जानता हूँ कि मेरे बहुत सारे साथी मेरी इस बात से सहमत नही होंगे। *परन्तु इसका एक दूसरा पहलू भी है काले झंडे दिखाने के बाद पुलिस के अधिकारी हमारे साथियों पर मुकदमे दर्ज कर बड़ी-2 धाराएं लगा देते है। जिसे हमारे बहुत सारे नवयुवकों का भविष्य खराब होने का खतरा है*। राजनीति में  किसी बात का विरोध करना कोई गलत नही है। परन्तु विरोध का एक तरीका होना चाहिए काले झंडे दिखाने से या किसी भी बड़े नेता या मुख्यमंत्री या मंत्री की मुर्दाबाद करने से कोई भी  बड़ा नेता नही बन सकता है। अगर आपको लगता है कि कोई सरकार जनता या अपने किये वादों पर खरी नही उतर रही है तो उसका विरोध दर्ज करने के लिए धरना प्रदर्शन ज्ञापन देना चाहिए। कोई भी आंदोलन करना हम सब का अधिकार है। परंतु कोई भी धरना प्रदर्शन या आंदोलन हिसक नही होना चाहिए शाँति पूर्वक हम अपनी बात जिले DM को ज्ञापन के रूप में मिलकर कह सकते है।
  दिनांक 27/04/2018 को प्रदेश के मुख्यमंत्री  आदरणीय योगी जी का जनपद बुलंदशहर में आगमन हुआ। आगमन के बाद किसान यूनियन का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला , हाईकोर्ट बार के सम्बंध में डिस्ट्रिक्ट बार के अध्यक्ष सुमन राधव जी के नेतृत्व में उनसे मिले। तथा बहुत सारे जिले के सामाजिक संगठन के नेतागण मुख्यमंत्री जी से मिले और अपनी अपनी बात रखी। इसी प्रकार अगर हमको भी कोई समस्या है तो हमे भी DM  के माध्यम से जनपद आगमन पर मुख्यमंत्री / प्रभारी मंत्री/ बड़े नेताओं से मिलकर अपनी बात रख सकते है।
   आदरणीय साथियों किसी भी मुख्यमंत्री/ मंत्री तथा राजनैतिक  दलों के बड़े नेताओं काले झंडे दिखाना कोई बड़ी बात नही है परन्तु उस समय VIP की सुरक्षा और आपकी जान को कोई भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। मेरे बहुत सारे साथी इस बात को नही जानते कि आदरणीय श्री मुलायम सिंह यादव जी, आदरणीय श्री राजनाथ सिंह जी ग्रह मंत्री भारत सरकार,  आदरणीय श्री आदित्यनाथ योगी जी मुख्यमंत्री , आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी पूर्व मुख्यमंत्री , बहन कु0 मायावती जी पूर्व मुख्यमंत्री, आदरणीय प्रकाश सिंह बादल पूर्व मुख्यमंत्री,  आदरणीय श्री रमन सिंह जी, आदरणीय श्री गुलाम नवी आजाद ये सभी राजनेता देश को सबसे बडी सुरक्षा एजेंसी जेड प्लस With NSG कमांडों With QRT इन सभी को प्राप्त है इस सुरक्षा में जो साथी काले झंडे या विरोध प्रदर्शन इनके वाहनों के आसपास करते है या करना चाहते है गलत है। इसे हमारी जान को भी खतरा हो सकता है। ये सभी आदरणीय नेतागण हमारे देश की धरोधर है। कृपया इनकी सुरक्षा का तथा अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखे।  भविष्य में अगर हमारे कुछ साथियों को कोई समस्या है या कोई जनता की बात रखनी है तो उसके लिए उचित मंच के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए ना कि काले झंडे दिखकर आदरणीय नेतागण और अपनी जान के खिलवाड़ करना चाहिए।

          आपका स्नेहकांक्षी।
               दिनेश गुर्जर
              प्रदेश अध्यक्ष
  अखिल भारतीय गुर्जर महासभा
                उत्तर प्रदेश