मंगलवार, 1 अगस्त 2017

न्याय की आस में अन्नत्याग के 600 दिन पूरे, पीरदान सिंह राठौड़ की कहानी उन्हीं की जुबानी से

न्याय की आस में अन्नत्याग के 600 दिन पूरे, पीरदान सिंह राठौड़ की अनोखी कहानी उन्हीं की जुबानी से
------------------------------------
अन्नत्याग अनसन के आज 600 दिन पूरे हो गये।इन 600 दिनों में कई कठिनाइयों का सामना हुवा,मौत को भी करीब से देखा है और दुनियां को भी करीब से देखने का मौका मिला।ज्यो-ज्यो समस्याएं सामने आती रही त्यों-त्यों शरीर दिमाग में छुपी हुई सामर्थ्य और शक्तियां बाहर निकलती गई जिससे कठिनाइयों से सामना करने में मदद मिलती रही।

इन 600 दिनों के अनसन से एक तरफ तो 100 प्रतिशत सफलता मिली है कि जो कलंक पीरदान-परिवार पर लगा था वो पूर्णतया धूल चुका।दूसरी तरफ न्याय के लिए जांच की मांग को लेकर निकला था उसमें पूरी तरह से असफलता ही मिली है पर मन में सकून यह रहा की जांच के लिए वो सब कुछ करने में सफल रहा जो एक आदमी को करना चाहिये। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से एक से अनेक बार आदेश करवा दिये उसके बाद भी एक आईपीएस अधिकारी नही मिल पाया तो यह हमारी नही बल्कि भारत के प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति,लोकतंत्र व सविंधान की बेइज्जती है।

इन 600 दिनों में कुछ गलतियां भी हुई है जिनके लिए सिर्फ पछतावा ही किया जा सकता है मुख्य रूप से गलती यह रही की उन लोगो पर भरोषा किया जो खुद भरोषा लायक नही थे,उन लोगो पर विश्वास जता बैठा जो खुद विश्वास के लायक नही थे।जीत नही पाया जिसका मुख्य कारण यह रहा की 99 बेईमान एक तरफ हो गये जिससे ईमानदार बेबस हो गया क्योंकि 99 कुत्ते मिलकर एक शेर की शिकार तो नही कर पाये लेकिन सफलता के रास्ते में रोड़ा जरूर बन गये।

और सबसे बड़ी गलती यह कर बैठा की इस देश के सविंधान को 26 जनवरी 1950 का मान बैठा जबकि यह सविंधान तो 1935 में ही अंग्रेजो ने लिख दिया था।अंबेडकर ने तो इसके ऊपर सिर्फ रंग-रोशन,पेंट-चूना लगाकर पंडित नेहरू के हाथों में थमा दिया था जिसमे अंग्रेजो दुवारा किये गये अन्याय अत्याचार पर पर्दा डालने के लिए ज्यादा काम आता है और आम जनता को न्याय के नाम पर लोलीपोप या फिर बाबाजी का ट्ठुलु ही पकड़ाया गया है इसी सविंधान से गोरे अंग्रेज अपने आप को बचाते थे और उनके बाद उनके दुवारा पैदा की गई नाजायज औलादे जो काले अंग्रेजो की शक्ल में कुर्शियो पर बैठे हुये है वो भी इसी सविंधान की आड़ लेकर अपने कुकर्मो को छिपाने का काम करते चले जा रहे हैं।

जो 600 दिन पहले मांग थी वही माँग आज है-विभिन न्यायालयों में दर्ज 9 मुकदमो की सीबीआई जांच या फिर स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अधीक्षक श्री पंकज चौधरी व इनकी टीम से जाँच हो।प्रण वही है जो 600 दिन पहले था-अनसन उसी दिन खत्म होगा जिस दिन जांच मिलेगी या फिर मौत मिलेगी।

रघुकुल रीत सदा चली आई,प्राण जाय पर वचन नही जाई।अनसन मेरी नया है,कलम मेरी पतवार है,हर पल की हर जानकारी,खुले आम बाजार है। 100 में से 99 बेईमान फिर भी मेरा भारत महान।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें